तद्भव शब्दों के उदाहरण (सूर्य से सूरज, चंद्र से चाँद)

Arpit Nageshwar
⏰ 1 min read

सूर्य का तद्भव शब्द "सूरज" है और चंद्र (चंद्रमा) का तद्भव शब्द "चाँद" है। दोनों ही संस्कृत के तत्सम शब्दों से बदलकर बने आम बोलचाल के तद्भव रूप हैं।

तत्सम और तद्भव शब्द किसे कहते हैं?

जो शब्द संस्कृत से बिना किसी बदलाव के ज्यों-का-त्यों हिंदी में आ गए, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं — जैसे सूर्य, चंद्र, अग्नि। और जो शब्द समय के साथ बोलचाल में बदलकर आसान रूप ले लेते हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहा जाता है — जैसे सूर्य से सूरज, चंद्र से चाँद। तद्भव का शाब्दिक अर्थ ही है "उससे उत्पन्न", यानी तत्सम शब्द से जन्मा हुआ रूप।

सूर्य का तद्भव शब्द क्या है?

सूर्य एक तत्सम शब्द है, और इसका तद्भव रूप है सूरज। संस्कृत के "सूर्य" में जो संयुक्त ध्वनि "र्य" थी, वह बोलचाल में सरल होकर "ज" में बदल गई, जिससे सूर्य से सूरज शब्द बना। दैनिक भाषा और लेखन दोनों में सूरज ही common रूप से प्रयोग होता है।

चंद्र (चंद्रमा) का तद्भव शब्द क्या है?

चंद्र या चंद्रमा तत्सम शब्द हैं, और इनका तद्भव रूप है चाँद। यहाँ "चंद्र" के अंत की "र" ध्वनि लुप्त हो गई और शब्द में अनुनासिकता (चंद्र → चाँद) आ गई, जिससे उच्चारण छोटा और सहज हो गया।

सूरज और चाँद — तत्सम हैं या तद्भव?

सूरज और चाँद दोनों तद्भव शब्द हैं, तत्सम नहीं। इनके तत्सम रूप क्रमशः सूर्य और चंद्र (चंद्रमा) हैं। ध्यान रहे — सूर्य और चंद्रमा दो अलग-अलग वस्तुएँ (सूर्य और चाँद) हैं, इसलिए एक का तत्सम दूसरे का पर्याय नहीं बनता; हर शब्द का तत्सम-तद्भव जोड़ा अपने ही अर्थ के भीतर बनता है — सूर्य↔सूरज और चंद्र↔चाँद।

शब्दप्रकारजोड़ीदार रूप
सूर्यतत्समसूरज (तद्भव)
सूरजतद्भवसूर्य (तत्सम)
चंद्र / चंद्रमातत्समचाँद (तद्भव)
चाँदतद्भवचंद्र / चंद्रमा (तत्सम)

तद्भव शब्दों के उदाहरण (तत्सम → तद्भव)

नीचे दिए गए पहले दो उदाहरण — सूर्य→सूरज और चंद्र→चाँद — सबसे common हैं। इसके बाद कुल मिलाकर 19 और उदाहरण दिए गए हैं, जो किसी भी परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

क्रमतत्समतद्भव
1सूर्यसूरज
2चंद्रचाँद
3अग्निआग
4वायुहवा
5हस्तहाथ
6कर्णकान
7मुखमुँह
8दंतदाँत
9नयननैन
10जिह्वाजीभ
11अक्षिआँख
12गृहघर
13दुग्धदूध
14ग्रामगाँव
15क्षेत्रखेत
16कर्मकाम
17हृदयहिय
18नासिकानाक
19पादपाँव

तद्भव शब्द किस तरह बनते हैं (पैटर्न)

तत्सम से तद्भव बनने की प्रक्रिया अचानक नहीं होती — यह चार मुख्य तरीकों से होती है।

ध्वनि-सरलीकरण कर्ण कान दंत दाँत ध्वनि-लोप चंद्र चाँद हृदय हिय संयुक्ताक्षर-सरलीकरण सूर्य सूरज जिह्वा जीभ

यह चित्र दिखाता है कि तत्सम शब्द अलग-अलग तरीकों से सरल होकर तद्भव रूप कैसे लेते हैं।

  • ध्वनि-सरलीकरण: कठोर व्यंजन नरम हो जाते हैं — कर्ण→कान, दंत→दाँत।
  • ध्वनि-लोप: शब्द के बीच या अंत की कोई ध्वनि गिर जाती है — चंद्र→चाँद, हृदय→हिय।
  • संयुक्ताक्षर-सरलीकरण: जटिल संयुक्त अक्षर टूटकर आसान बनते हैं — सूर्य→सूरज, जिह्वा→जीभ।
  • अनुनासिकता आना: शब्द में नाक से निकलने वाली ध्वनि जुड़ जाती है — मुख→मुँह, दंत→दाँत।

तत्सम और तद्भव में अंतर

आधारतत्समतद्भव
उत्पत्तिसीधे संस्कृत से, बिना बदलावसंस्कृत से बदलकर बना
उच्चारणअपेक्षाकृत कठिनसरल और सहज
प्रयोगसाहित्यिक/औपचारिक भाषा में अधिकबोलचाल की भाषा में अधिक
उदाहरणसूर्य, चंद्र, अग्निसूरज, चाँद, आग

मुख्य बिंदु एक नज़र में

  • सूर्य (तत्सम) → सूरज (तद्भव)
  • चंद्र/चंद्रमा (तत्सम) → चाँद (तद्भव)
  • सूरज और चाँद दोनों तद्भव शब्द हैं, तत्सम नहीं
  • तद्भव शब्द चार तरीकों से बनते हैं: ध्वनि-सरलीकरण, ध्वनि-लोप, संयुक्ताक्षर-सरलीकरण, अनुनासिकता
  • तद्भव शब्द बोलचाल में और तत्सम शब्द औपचारिक भाषा में अधिक प्रयुक्त होते हैं
Arpit Nageshwar

✍️ Arpit Nageshwar

Post-graduated | Web Developer | +3 yr Experience